Rupee Fall: जमीन छू रहा रुपया… अब कैसे उठेगी भारतीय करन्सी? जानिए गिरावट से आपको क्या नुकसान

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Rupee Fall Against Dollar: हाल के कुछ महीनों में विश्व की सबसे मजबूत मानी जाने वाली करन्सी यानि डॉलर के सामने इंडियन करेंसी ‘रुपया’ में लगातार बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है और इसके अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90 तक टूटने की आशंका जताई जा रही है.

भारतीय करेंसी रुपया (Indian Currency Rupee) में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है और ये संभल नहीं पा रहा है. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ये 89.60 के लाइफ टाइम लो-लेवल तक टूट चुका है और ऐसी आशंका जताई जा रही है कि ये 90 के स्तर तक फिसल सकता है.

किसी भी देश की करेंसी का टूटना उसकी इकोनॉमी से साथ ही देश के निवासियों के लिए भी ठीक नहीं है और इसके एक नहीं, बल्कि कई साइड इफेक्ट देखने को मिलते हैं. ऐसे में रुपया के टूटने के सिलसिले पर ब्रेक लगना जरूरी है, नहीं ये तो बड़ी परेशानी का सबब बन सकता है. रुपया में गिरावट को लेकर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसा है.

इस साल भरभराकर फिसला रुपया

भारतीय रुपया के लिए साल 2025 खराब साबित हो रहा है और इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ये अमेरिकी डॉलर (US Dollar) के मुकाबले अब तक 4.5% से ज्यादा फिसल चुका है.

रॉयटर्स की रिपोर्ट की मानें, तो रुपये के 90 के स्तर तक फिसलने की आशंका बनी हुई है. बीते सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 98 पैसे टूटकर 89.66 प्रति डॉलर के अपने सबसे लो-लेवल पर बंद हुआ था. हालांकि, सोमवार को ये 89.46 पर ओपन हुआ.

क्या है Rupee में गिरावट के बड़े कारण?

बात करें, इंडियन करेंसी में लगातार जारी गिरावट के पीछे के कारणों के बारे में, तो एक नहीं बल्कि कई वजह सामने आती हैं. इनमें घरेलू और विदेशी बाजारों में बड़ी बिकवाली का दबाव और व्यापार संबंधी अनिश्चितताओं भी हैं.

रिपोर्ट में कारोबारियों के हवाले से कहा गया कि पोर्टफोलियो से धन निकासी, अमेरिका-भारत व्यापार समझौते (India-US Trade Deal) को लेकर अनिश्चितता का कायम रहना और केंद्रीय बैंक द्वारा प्रमुख स्तर पर बचाव के उपायों में कमी के कारण रुपये में गिरावट देखने को मिल रही है.

कारोबारियों और विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी टैरिफ (US Tariff On India) के कारण व्यापार और पोर्टफोलियो फ्लो पर बड़ा असर पड़ा है, जिससे रुपया पर दबाव बढ़ा है. उन्होंने कहा कि व्यापार समझौते के पूरा होने से मुद्रा को फिर से मजबूत होने में मदद मिल सकती है. वहीं फॉरेन करेंसी एडवाइजर फर्म IFA Global के सीईओ अभिषेक गोयनका ने आशंका जाहिर करते हुए कहा है कि रुपया 88.80-90.00 के नए स्तर पर स्थिर होगा.

कांग्रेस का सरकार पर निशाना

Congress ने सोमवार को डॉलर के मुकाबले रुपये में ‘Free Fall’ को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसा है और साल 2013 में गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर उनकी रुपये को लेकर की गई टिप्पणी को याद करने के लिए कहा, जिसमें उन्होंने UPA सरकार के दौरान ऐसी ही स्थिति का मजाक उड़ाया था.

सरकार पर निशाना साधते हुए, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा,’Dollar के मुकाबले रुपया लगातार गिर रहा है. अब यह 90 रुपये के निचले स्तर को पार करने वाला है.’ उन्होंने सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री को जुलाई 2013 की अपनी टिप्पणी याद है.

गिरावट न रुकी, तो महंगाई का खतरा

किसी भी देश की करेंसी का टूटना उसकी इकोनॉमी के लिए ठीक नहीं होता है और इसमें लगातार गिरावट को संभालना बेहद जरूरी होता है. इसी साल के शुरुआती महीनों में RBI की ओर से लगातार रुपये की गिरावट पर नजर रहने की बात कही जाती रही है. हालांकि, कुछ समय पहले पूर्व वित्त सचिव और वर्तमान में सेबी चेयरपर्सन तुहिन कांत पांडे ने कहा था कि रुपये में गिरावट चिंता की बात नहीं है, इंडियन करेंसी ‘फ्री फ्लोट’ है और इसके लिए कोई निश्चित दर तय नहीं की जाती.

डॉलर के मुकाबले रुपये के लगातार कमजोर होने से महंगाई बढ़ने का जोखिम बढ़ जाता है. इसका असर सीधे पेट्रोलियम पदार्थों से लेकर विदेशों में पढ़ाई करने वाले भारतीयों तक पर पड़ता है.

दरअसल, भारत कच्चे तेल का सबसे बड़ा आयातक (India Crude Oil Import) है और अपनी जरूरत का 80% Crude Oil आयात करता है. ऐसे में जब रुपया गिरता है, तो उसे तेल आयात के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं. इसकी भरपाई के क्रम में देश में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का खतरा रहता है. अगर ऐसा होता है, तो फिर ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स कॉस्ट में इजाफा होता है और इससे महंगाई बढ़ सकती है. साफ शब्दों में कहें, तो करेंसी में कमजोरी से आयातित सामान महंगे हो सकते हैं.

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