आज भी जारी रहेगा मार्केट में गिरावट का सिलसिला, एक दिन में 7 लाख करोड़ गंवाने के बाद क्या करें निवेशक

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Stock Market Updates: 8 दिसंबर को शेयर बाजार गिरा तो गिरता ही चला गया, हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट घबराने वाली नहीं है, बल्कि बाजार के ऊंचे स्तरों पर सामान्य सुधार यानि करेक्शन मानी जा सकती है. लेकिन कुछ भी हो सच्चाई ये भी है की वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ती है.

Share Market Highlights: लगातार दो सत्रों की बढ़त के बाद सोमवार को शेयर बाजार में जोरदार गिरावट हुई और सेंसेक्स 610 अंक लुढ़क गया, जबकि निफ्टी 26,000 के स्तर से नीचे आ गया. ऊंचे स्तर पर मुनाफावसूली और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रहने से बाजार पर दबाव बढ़ गया. विश्लेषकों ने कहा कि इस सप्ताह अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत बैठक से पहले निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया हुआ है. इससे बाजार धारणा और कमजोर हुई.

सेंसेक्स 609.68 अंक गिरकर 85,102.69 अंक पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान एक समय यह 836.78 अंक टूटकर 84,875.59 पर आ गया था. निफ्टी भी 225.90 अंक गिरकर 25,960.55 अंक पर आ गया. कारोबार के दौरान एक समय यह 294.2 अंक टूटकर 25,892.25 के निचले स्तर पर आ गया था.

निवेशकों के सात लाख करोड़ रुपये डूबे

भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों की संपत्ति में बड़ा झटका लगा. बाजार पूंजीकरण में भारी गिरावट के कारण निवेशकों के सात लाख करोड़ रुपये से अधिक का मूल्य एक ही दिन में नष्ट हो गया. यह गिरावट पिछले कई हफ्तों की तुलना में सबसे तीव्र मानी जा रही है.

हालांकि सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट उल्लेखनीय रही, लेकिन सबसे ज्यादा झटका मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों को लगा. दोनों ही इंडेक्स आज करीब 2% से ज्यादा टूट गए. विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में इन दोनों सेगमेंट में तेज तेजी आई थी, जिससे निवेशकों ने अचानक मुनाफावसूली शुरू कर दी. यह मुनाफावसूली बाजार पर भारी पड़ी और भारी बिकवाली देखी गई.

गिरावट के चार प्रमुख कारण:

  1. दुनियाभर के बाजारों में कमजोरी
    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शेयर बाजार दबाव में हैं. अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक से पहले निवेशक सतर्क हैं. ब्याज दरों में संभावित बदलाव, वैश्विक आर्थिक सुस्ती और भू-राजनीतिक तनावों ने दुनिया भर के बाजारों को कमजोर बनाया है. भारतीय बाजार भी इससे अछूता नहीं रहा.
  2. विदेशी निवेशकों की बिकवाली
    पिछले दो हफ्तों से विदेशी निवेशक लगातार भारतीय बाजार में बिकवाली कर रहे हैं. रुपया कमजोर होने और अमेरिकी बॉन्ड के लाभ में उतार-चढ़ाव ने विदेशी निवेशकों को भारत से पैसा निकालने के लिए प्रेरित किया. इससे सेंसेक्स और निफ्टी पर दबाव बढ़ा.
  3. तेजी के बाद स्वाभाविक मुनाफावसूली
    पिछले महीनों में बाजार में जबरदस्त तेजी देखी गई थी. कई मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में 40–60% तक उछाल आया था. ऐसे में निवेशकों ने मुनाफा बुक करना शुरू किया, जिसने बिकवाली का दबाव और बढ़ा दिया.
  4. बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में गिरावट
    बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी मार बैंकिंग, आईटी और वित्तीय शेयरों पर पड़ी. बैंकिंग क्षेत्र में ऋण मांग में सुस्ती के संकेत और वित्तीय कंपनियों पर बढ़ते कर्ज जोखिम की आशंकाओं ने निवेशकों को निराश किया.

फेड की बैठक पर नजर

विश्लेषक मानते हैं कि बाजार का अगले कुछ दिनों का रुख अमेरिका की फेडरल रिजर्व बैठक, विदेशी निवेशकों के रुझान और रुपया-डॉलर की चाल पर निर्भर करेगा. यदि वैश्विक संकेत कमजोर रहते हैं, तो भारतीय बाजार में और दबाव बन सकता है. हालांकि, सकारात्मक बात यह है कि बड़े और मजबूत लार्ज-कैप शेयरों में गिरावट सीमित रही. यह संकेत देता है कि बाजार में आधारभूत मजबूती बरकरार है.

यह गिरावट घबराने वाली नहीं है

विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट घबराने वाली नहीं है, बल्कि बाजार के ऊंचे स्तरों पर सामान्य सुधार मानी जा सकती है. हालांकि, अगर वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ती है, तो आने वाले दिनों में अस्थिरता बनी रह सकती है. कुल मिलाकर, आज की गिरावट ने बाजार को हिला दिया है, लेकिन विशेषज्ञ इसे एक स्वस्थ सुधार मानते हैं, न कि किसी गहरी संकट की शुरुआत.

निवेशकों के लिए सलाह

-घबराहट में बेचने से बचें

-पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखें

-मिडकैप-स्मॉलकैप में जोखिम संतुलित रखें

-लंबे निवेश नजरिये वाले निवेशकों को यह गिरावट अवसर भी दे सकती है

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